गुजरात के बाद अब राजस्थान में बायो प्लांट की पहली बड़ी परियोजना
आहोर ,जालोर। (छगन मीना) आहोर उपखंड के ग्राम चांदराई में सोमवार को ऊर्जा क्षेत्र की एक ऐतिहासिक परियोजना की औपचारिक शुरुआत हुई। सोमनाथ बायो गैस प्राइवेट लिमिटेड व सोमनाथ एनर्जी कंपनी प्राइवेट लिमिटेड की ओर से प्रस्तावित बायो-सीएनजी प्लांट का विधिवत भूमि पूजन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उमसिंह चांदराई, केम प्रोसेस सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जिग्नेश भाई मथानिया, अभय भाई, राहुल भाई सहित क्षेत्र के कई गणमान्य लोगों ने शिरकत की। चांदराई सरपंच किशोर सिंह, अर्जुन सिंह और आसपास के गांवों के जनप्रतिनिधि भी भारी संख्या में उपस्थित रहे।

600 करोड़ की लागत से स्थापित होंगे 10 बायो-सीएनजी प्लांट
कंपनी द्वारा चांदराई क्षेत्र में लगभग 600 करोड़ रुपये की लागत से 10 अत्याधुनिक बायो-सीएनजी प्लांट स्थापित किए जाएंगे। ये प्लांट अलग-अलग प्लॉट्स पर चरणबद्ध रूप से विकसित होंगे, जिनमें गैस उत्पादन, भंडारण और प्रसंस्करण हेतु आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। परियोजना के पूर्ण होने पर यह प्लांट न सिर्फ स्थानीय ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि जालोर जिले को राज्य के ऊर्जा मानचित्र पर नई पहचान भी दिलाएगा।
◆ क्षेत्रीय लोगों को मिलेगा रोजगार का अवसर
परियोजना के निर्माण और संचालन से सैकड़ों युवाओं को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। मशीन संचालन, सुरक्षा, परिवहन, निर्माण, रखरखाव और प्रशासनिक कार्यों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे और मजदूरी के लिए पलायन में कमी आएगी।
◆ नेपियर घास की खेती को देंगे बढ़ावा
गैस उत्पादन के लिए नेपियर घास, गोबर और कृषि अपशिष्ट का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए चांदराई सहित आसपास के गांवों की करीब 10 हजार बीघा भूमि पर नेपियर की खेती कराई जाएगी। किसानों से अनुबंध कर उन्हें स्थायी और सुनिश्चित आय का अवसर प्रदान किया जाएगा। रोपाई, कटाई और ढुलाई के कार्यों में भी ग्रामीणों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
◆ राजस्थान में बायो सीएनजी की पहली बड़ी परियोजना
कंपनी प्रतिनिधियों ने बताया कि गुजरात के बाद राजस्थान में इस स्तर का यह पहला बड़ा बायो-सीएनजी प्रोजेक्ट है। जालोर जिला अब हरित ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी बनने जा रहा है, जिससे भविष्य में आहोर क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से बड़े बदलाव की ओर बढ़ेगा।
◆ पर्यावरण संरक्षण में भी होगा लाभ
यह प्लांट पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा। कृषि अपशिष्ट और जैविक कचरे से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन कर प्रदूषण में कमी आएगी और हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीणों ने परियोजना को क्षेत्र के विकास का नया अध्याय बताते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और बुनियादी सुविधाओं में तेजी से सुधार की उम्मीद जताई है। कंपनी ने आश्वस्त किया कि निर्माण कार्य शीघ्र ही शुरू किया जाएगा और निर्धारित समय सीमा में उत्पादन प्रारंभ कर दिया जाएगा।

