लोढ़ा ने “मनरेगा बचाओ – महासंग्राम अभियान” के तहत गांवों में किया जनसंपर्क
सिरोही – रमेश टेलर
सिरोही तहसील के 31 गांव जल जीवन मिशन से नहीं जुड़े हैं और 45 गांव ऐसे हैं जो जेजेएम से तो जुड़े हैं लेकिन किसी बांध की पेयजल योजना से नहीं जुड़े। इस तरह कुल 76 गांव ऐसे हैं जो किसी भी बांध की पेयजल योजना से नहीं जुड़े हैं। शिवगंज तहसील के 71 गांवों को जवाई बांध की पेयजल योजना से जोड़ने का काम करीब ढाई वर्षों से चालू हैं। इसे अप्रैल 2025 में पूरा जो जाना चाहिए था लेकिन ढिलाई के चलते ऐसा लगता हैं कि यह कार्य 2027 में पूरा होगा। सिरोही तहसील के आठ गांव बत्तीसा नाला बांध के पानी की परियोजना से जोड़े जा रहे हैं। सिरोही तहसील के बचे हुए 76 गांव को जवाई बांध का पानी उपलब्ध कराने के लिए 2023 में अशोक गहलोत की सरकार ने डीपीआर बनवाई थी जिसे स्वीकृत करके जवाई बांध की पेयजल योजना से उनको जोड़ा जाना है लेकिन भाजपा की सरकार इस पर कोई काम नहीं कर रही है। जवाई बांध में सिरोही और शिवगंज तहसील को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 1000 एमसीएफटी पानी आरक्षित किया गया है और 2023 में दो नए बांध का चाक और बुज सांडमारिया का कार्य देश जारी किया गया था। झाड़ोल उपखंड अधिकारी के यहां संबंधित प्रभावित किसानों के मुआवजे का पैसा भी 2023 से जमा है लेकिन भाजपा की सरकार ना तो सर्वे कर रही है, ना काश्तकारों को मुआवजे का पैसा दे रही है और न हीं दोनों बांध का काम को आगे बढ़ा रही है इससे सिरोही जिले के गांव के लोगों को पाने की भारी कठिनाई का कई स्थानों पर सामना करना पड़ रहा हैं। लोढ़ा मनरेगा बचाओ – महासंग्राम अभियान के तहत ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, सिरोही द्वारा मोहब्बतनगर, फुंगनी, जेला, मडिया, हालीवाड़ा, मेर मांडवाड़ा, सिलदर, आमलारी, सनपुर में ग्रामीणों को संबोधित कर रहे थे।
मनरेगा पिछले 20 वर्षों से भारत के मजदूरों की जीवनरेखा रही – संयम लोढ़ा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान, जब मोदी सरकार ने बिना किसी योजना के लॉकडाउन लागू कर दिया, उसके चलते लाखों प्रवासी मज़दूर घर लौटने को मजबूर हुए और काम से वंचित हो गए। ऐसे समय में मनरेगा ने 4.6 करोड़ परिवारों को रोज़गार दिया था। 2006 में लागू होने के बाद से अब तक मनरेगा के तहत कुल मिलाकर 180 करोड़ से अधिक कार्य-दिवस सृजित किए जा चुके हैं।
लोढ़ा ने कहा कि मनरेगा के तहत लगभग 10 करोड़ परिसंपत्तियों का निर्माण किया गया, जिनमें गाँवों के तालाब और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं। मोदी सरकार का अब तक का रिकॉर्ड उसकी मंशा को साफ़ दिखाता है। योजना के तहत घोषित मज़दूरी में मोदी सरकार के 11 वर्षों के दौरान मुश्किल से ही कोई बढ़ोतरी हुई है।
उच्च महँगाई के बावजूद पिछले तीन वर्षों से मनरेगा के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
इस दौरान कांग्रेस पदाधिकारियों के साथ कार्यकर्ता व काफी संख्या में ग्रामीण मौजुद रहे।

