आहोर, जालोर। तत्कालीन ग्राम पंचायत को बख्शीश की गई सरकारी जमीन के नामांतरण का मामला विवादों में आ गया है। आरोप है कि तहसीलदार ने बिना राज्य सरकार और जिला कलेक्टर की अनुमति के ही न्यायालय के आदेश के बाद म्यूटेशन भर दिया। नियमों के अनुसार, ऐसी जमीनों के नामांतरण से पहले कलेक्टर और सरकार से अनुमति आवश्यक होती है, ताकि सरकारी संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।
बख्शीश की जमीन पर पालिका की कमजोर पैरवी
मामला आहोर के जोधपुर रोड पर स्थित खसरा नंबर 1008 और 1009 की जमीन का है, जिसकी कुल रकबा 16.75 बीघा बताया जा रहा है। यह जमीन कई वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने ग्राम पंचायत आहोर को रजिस्टर्ड बख्शीश के रूप में दी थी। उसके बाद पंचायत ने इस पर अपना बोर्ड भी लगा दिया था। वर्ष 2017 में बख्शीशकर्ता के वारिसों ने उच्च न्यायालय में बख्शीश को रद्द करने का दावा दायर किया, लेकिन उस दौरान ग्राम पंचायत को नगर पालिका में क्रमोन्नत किए जाने के बाद पालिका की ओर से मजबूत पैरवी नहीं की गई
तहसीलदार बोले– न्यायालय के आदेश की पालना की
तहसीलदार लदाराम पंवार ने बताया कि उन्होंने न्यायालय के आदेशों की पालना में ही म्यूटेशन भरा है। उनका कहना है कि जो जमीन पंचायत के कब्जे में थी, उसे पंचायत को दी गई और शेष जमीन खातेदारों को लौटा दी गई।

